" " //psuftoum.com/4/5191039 Live Web Directory नागरनौसा में डिग्री कॉलेज बचाने की लड़ाई तेज //whairtoa.com/4/5181814
Type Here to Get Search Results !

नागरनौसा में डिग्री कॉलेज बचाने की लड़ाई तेज

 



2024 से जारी SFI आंदोलन अब बना जनआंदोलन, छात्रों ने कहा – “शिक्षा पर हमला बर्दाश्त नहीं”

नागरनौसा/नालंदा।
नागरनौसा में डिग्री कॉलेज को बचाने और उसे बाजार क्षेत्र में ही संचालित करने की मांग को लेकर छात्रों, नौजवानों और ग्रामीणों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। 2024 से लगातार संघर्ष कर रहा छात्र संगठन SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सड़क जाम, धरना, ज्ञापन, प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन आंदोलन के जरिए छात्र-युवा सरकार और प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं।




छात्रों का आरोप है कि सरकार गरीब और ग्रामीण छात्रों की शिक्षा छीनने की साजिश कर रही है। नागरनौसा बाजार से कॉलेज को दूर स्थानांतरित करने के फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान किसान-मजदूर परिवारों के बच्चों को होगा, जो पहले ही आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

SFI नेताओं ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था, तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब गांवों के बच्चे भी उच्च शिक्षा हासिल कर पाएंगे। लेकिन आज वही कॉलेज छात्रों की पहुंच से दूर किया जा रहा है। यह केवल कॉलेज शिफ्टिंग का मामला नहीं, बल्कि गरीबों के शिक्षा अधिकार पर हमला है।

पिछले दो वर्षों से SFI लगातार ज्ञापन दे रही है। प्रखंड विकास पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी और बिहार सरकार को कई बार मांगपत्र सौंपे गए। गांव-गांव अभियान चलाया गया, हस्ताक्षर अभियान हुआ, छात्रों और अभिभावकों से संवाद किया गया। लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने आंदोलन को और उग्र बना दिया।




हाल के दिनों में आंदोलन ने नया मोड़ लिया, जब छात्रों ने सड़क पर उतरकर NH-431 को जाम कर दिया। घंटों तक चले प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल रहीं। भीषण गर्मी के बावजूद छात्र नारे लगाते रहे –
“गरीबों का हक छीनना बंद करो!”
“नागरनौसा में ही कॉलेज चलाना होगा!”
“शिक्षा बेचने वालों होश में आओ!”

धरना स्थल पर मौजूद एक छात्रा ने कहा,
“हमारे माता-पिता मजदूरी करके हमें पढ़ा रहे हैं। अगर कॉलेज दूर चला गया तो हममें से कई लड़कियों की पढ़ाई छूट जाएगी। सरकार हमारी जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।”

SFI की राज्य अध्यक्ष कांती कुमारी ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक कॉलेज की नहीं, बल्कि शिक्षा में बराबरी और सामाजिक न्याय की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है ताकि गरीब छात्र उच्च शिक्षा से बाहर हो जाएं।




उन्होंने कहा,
“कम्युनिस्ट आंदोलन हमेशा से शिक्षा, रोजगार और बराबरी के अधिकार के लिए लड़ता आया है। नागरनौसा की यह लड़ाई भी उसी संघर्ष का हिस्सा है। जब तक कॉलेज बाजार क्षेत्र में शुरू नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।”

ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। लोगों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में पर्याप्त सरकारी जमीन और स्कूल परिसर उपलब्ध है, जहां आसानी से डिग्री कॉलेज संचालित किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रशासन छात्रों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है।

SFI कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द फैसला नहीं लेती, तो आंदोलन को पूरे नालंदा जिले में फैलाया जाएगा। आने वाले दिनों में छात्र-युवा महापंचायत, मशाल जुलूस और बड़े जनप्रदर्शन की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

नागरनौसा की सड़कों पर उठ रही यह आवाज अब सिर्फ कॉलेज की मांग नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के गरीब छात्रों के सपनों को बचाने की लड़ाई बन चुकी है।

Top Post Ad

Below Post Ad

Hollywood Movies